रक्षाबंधन पर कोपल वाणी और मिनी मार्वेल्स स्कूल के बच्चों ने राज्यपाल को बांधीं हाथों से बनाई राखियां; समान अवसर और समावेशिता का दिया संदेश
रायपुर (Economy India): रक्षाबंधन के पावन अवसर पर रायपुर स्थित लोक भवन में स्नेह, अपनत्व और समावेशिता का भावपूर्ण दृश्य देखने को मिला। कोपल वाणी के श्रवण बाधित दिव्यांग बच्चों और मिनी मार्वेल्स स्कूल के नन्हे बच्चों ने राज्यपाल रमेन डेका से मुलाकात कर उन्हें अपने हाथों से बनाई राखियां बांधीं।
बच्चों ने राज्यपाल की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनके स्वस्थ, सुखी और दीर्घायु जीवन की कामना की। इसके बाद बच्चों ने उन्हें मिठाई खिलाई और अपने हाथों से तैयार की गई राखियों की विशेषता के बारे में भी बताया।

बच्चों की रचनात्मकता ने जीता दिल
मासूम हाथों से तैयार की गई राखियां जब राज्यपाल रमेन डेका की कलाई पर सजीं तो लोक भवन का माहौल आत्मीयता और भावनाओं से भर गया। राज्यपाल ने बच्चों के स्नेह को सहर्ष स्वीकार करते हुए उन्हें आशीर्वाद दिया और उपहार भेंट कर उनका उत्साह बढ़ाया।
विशेष रूप से कोपल वाणी के दिव्यांग बच्चों के लिए यह अवसर सम्मान, आत्मविश्वास और गौरव से जुड़ा रहा। अपने हाथों से राखियां तैयार कर उन्हें राज्यपाल को बांधना उनकी रचनात्मकता, कौशल और आत्मनिर्भरता का सुंदर उदाहरण बना।
दिव्यांग बच्चों को समान अवसर देने का संदेश
रक्षाबंधन के इस कार्यक्रम ने समाज को महत्वपूर्ण संदेश भी दिया कि दिव्यांग बच्चे समाज की मुख्यधारा का अभिन्न हिस्सा हैं। उनकी प्रतिभा और क्षमताओं को पहचानने के साथ उन्हें आगे बढ़ने के लिए समान अवसर और आवश्यक प्रोत्साहन देना जरूरी है।
राज्यपाल रमेन डेका ने बच्चों की प्रतिभा और उत्साह की सराहना करते हुए कहा कि रक्षाबंधन प्रेम, स्नेह और पारस्परिक विश्वास का पर्व है। बच्चों का यह आत्मीय स्नेह मन को छू लेने वाला है। उन्होंने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की और दिव्यांग बच्चों की प्रतिभा को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया।

आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा
बच्चों द्वारा स्वयं राखियां तैयार करना केवल रक्षाबंधन की परंपरा से जुड़ा आयोजन नहीं रहा, बल्कि यह उनके कौशल और आत्मविश्वास को सामने लाने का अवसर भी बना। ऐसे कार्यक्रम बच्चों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने और समाज के विभिन्न वर्गों के साथ सक्रिय रूप से जुड़ने का मंच प्रदान करते हैं।
समावेशी समाज के निर्माण के लिए शिक्षा, कौशल विकास और सामाजिक सहभागिता के अवसरों में दिव्यांग बच्चों की समान भागीदारी महत्वपूर्ण है। लोक भवन में आयोजित यह आत्मीय मुलाकात इसी भावना को मजबूत करती दिखाई दी।

रक्षाबंधन ने दिया समावेशिता का संदेश
रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का पर्व है, लेकिन लोक भवन में हुए इस आयोजन ने इसके भाव को और व्यापक बना दिया। बच्चों का स्नेह, राज्यपाल का आत्मीय व्यवहार और उनके प्रति सम्मान ने समानता, संवेदनशीलता और समावेशी समाज का संदेश दिया।
ऐसे आयोजन यह याद दिलाते हैं कि समाज में हर बच्चे की प्रतिभा और भावनाओं को सम्मान मिलना चाहिए और दिव्यांग बच्चों के लिए अवसरों के दरवाजे समान रूप से खुले होने चाहिए।
(Economy India)







