सहारनपुर की स्वाभिमान रैली में रालोद अध्यक्ष का सपा पर निशाना, बोले- किसान बहुमत में हैं लेकिन राजनीतिक गलियारों में उनकी लॉबी कमजोर
सहारनपुर (Economy India): राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के अध्यक्ष और केंद्रीय राज्यमंत्री जयंत चौधरी ने बृहस्पतिवार को सहारनपुर में आयोजित स्वाभिमान रैली के दौरान समाजवादी पार्टी (सपा) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि किसानों को यह पहचानने की जरूरत है कि वास्तव में उनके हितों के लिए कौन खड़ा है और कौन केवल राजनीति के लिए किसान मुद्दों का इस्तेमाल करता है।
रामपुर मनिहारान स्थित गोचर इंटर कॉलेज परिसर में आयोजित रैली को संबोधित करते हुए जयंत चौधरी ने कहा कि किसान देश की आबादी का बड़ा हिस्सा हैं और उनके समर्थन से सरकारें बनती-बिगड़ती हैं, लेकिन राजनीतिक गलियारों में किसानों की आवाज अपेक्षाकृत कमजोर है। ऐसे में किसानों को अपने हितों की मजबूती से पैरवी करने वाला राजनीतिक नेतृत्व चुनना चाहिए।
सपा पर चौधरी अजित सिंह को लेकर हमला
जयंत चौधरी ने सपा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि समाजवादी नेता किसानों और खेती का विरोध करते-करते अब रालोद के संस्थापक और उनके पिता चौधरी अजित सिंह की विरासत का भी विरोध करने लगे हैं।
उन्होंने कहा कि किसान राजनीति केवल चुनावी मुद्दा नहीं बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश सहित देश के ग्रामीण क्षेत्रों की आर्थिक और सामाजिक संरचना से जुड़ा विषय है। उनके अनुसार किसानों की समस्याओं को राजनीतिक बहस के केंद्र में रखना जरूरी है।

किसानों की राजनीतिक ताकत को पहचानने की अपील
रालोद अध्यक्ष ने कहा कि किसान बहुमत में हैं और सरकारों के गठन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। इसके बावजूद किसान हितों की राजनीतिक पैरवी उतनी मजबूत नहीं है, जितनी होनी चाहिए।
जयंत चौधरी ने किसानों से अपने हितों के लिए मजबूत राजनीतिक आवाज चुनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि किसानों को यह तय करना होगा कि कौन उनके मुद्दों को सरकार और राजनीतिक मंचों पर प्रभावी ढंग से उठाता है।
गन्ना किसानों का मुद्दा भी उठा
रैली में जयंत चौधरी ने गन्ना किसानों की स्थिति और चीनी उद्योग से जुड़े मुद्दों पर भी बात की। उन्होंने बताया कि उन्होंने हाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर गन्ना किसानों की स्थिति पर चर्चा की है।
उन्होंने गन्ना नियंत्रण व्यवस्था को लेकर भी बातचीत का उल्लेख किया। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों का मुद्दा लंबे समय से ग्रामीण अर्थव्यवस्था और राजनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।
गन्ने का उत्पादन बढ़ने का दावा
रैली से जुड़े स्थानीय समाचारों के अनुसार जयंत चौधरी ने उत्तर प्रदेश में गन्ने के उत्पादन में वृद्धि का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राज्य में 2016-17 के दौरान गन्ने का उत्पादन लगभग 1,400 लाख टन था, जो अब बढ़कर करीब 2,400 लाख टन हो गया है।
उनका जोर इस बात पर रहा कि गन्ना किसानों, चीनी उद्योग और उससे जुड़े आर्थिक हितों को व्यापक नीति के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
एथनॉल और चीनी नीति पर भी विपक्ष को घेरा
जयंत चौधरी ने एथनॉल और चीनी से जुड़े मुद्दों को भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बनाया। उन्होंने विपक्ष पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि चीनी और एथनॉल की कीमतों पर चर्चा की जा रही है, तो गन्ना किसानों की आय और उनके हितों पर भी उतनी ही गंभीरता से बात होनी चाहिए।
एथनॉल उत्पादन को लेकर उनका तर्क किसानों के लिए गन्ने के अतिरिक्त बाजार और चीनी उद्योग की अर्थव्यवस्था से जुड़ा रहा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गन्ना खेती बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवारों की आय का महत्वपूर्ण स्रोत है।
अखिलेश यादव और सपा के साथ बढ़ी राजनीतिक तल्खी
जयंत चौधरी के ताजा बयानों से रालोद और सपा के बीच राजनीतिक दूरी भी स्पष्ट होती दिखाई दे रही है। हाल के दिनों में जयंत चौधरी और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के बीच सार्वजनिक बयानबाजी तेज हुई है।
सहारनपुर की रैली में जयंत चौधरी ने अखिलेश यादव पर भी निशाना साधा और गन्ने के मूल्य जैसे किसान मुद्दों पर खुलकर बोलने की चुनौती दी। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक रैली में एथनॉल, गन्ने के दाम, चीनी की कीमत और किसान राजनीति प्रमुख मुद्दों में रहे।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में किसान मुद्दे अहम
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में किसान, गन्ना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था लंबे समय से महत्वपूर्ण मुद्दे रहे हैं। रालोद का राजनीतिक आधार भी क्षेत्र की किसान राजनीति से गहराई से जुड़ा रहा है।
ऐसे में जयंत चौधरी का किसानों को अपना “मजबूत वकील” चुनने का संदेश केवल कृषि नीति तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे आगामी राजनीतिक समीकरणों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। हालिया राजनीतिक घटनाक्रम में रालोद और सपा के बीच बढ़ती दूरी ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के राजनीतिक समीकरणों पर भी चर्चा तेज कर दी है।

किसान हित बनाम राजनीतिक बयानबाजी
जयंत चौधरी के बयान का मुख्य संदेश यह रहा कि किसानों को राजनीतिक दलों के दावों का मूल्यांकन उनके वास्तविक काम और किसान हितों के आधार पर करना चाहिए।
गन्ने के दाम, समय पर भुगतान, एथनॉल, चीनी उद्योग, कृषि लागत और ग्रामीण आय जैसे मुद्दे किसानों के लिए सीधे आर्थिक महत्व रखते हैं। ऐसे में आने वाले समय में इन विषयों पर राजनीतिक दलों के बीच बहस और तेज होने की संभावना है।
(Economy India)







