• ABOUT US
  • CONTACT
  • TEAM
  • TERMS & CONDITIONS
  • GUEST POSTS
Saturday, April 4, 2026
  • Login
Economy India
No Result
View All Result
  • Home
  • Economy
  • Business
  • Companies
  • Finance
  • People
  • More
    • Insurance
    • Interview
    • Featured
    • Health
    • Technology
    • Entrepreneurship
    • Opinion
    • CSR
    • Stories
  • Home
  • Economy
  • Business
  • Companies
  • Finance
  • People
  • More
    • Insurance
    • Interview
    • Featured
    • Health
    • Technology
    • Entrepreneurship
    • Opinion
    • CSR
    • Stories
No Result
View All Result
Economy India
No Result
View All Result
Home Opinion

देश के भविष्य पर मंडराता खतरा!

by Economy India
January 26, 2022
Reading Time: 2 mins read
FEATURED IMAGE ECONOMY INDIA 1 1
SHARESHARESHARESHARE

बढ़ती नवजात व शिशु मृत्यु दर, महिलाओं में घटती प्रजनन दर और बढ़ता कुपोषण भारत के युवा राष्ट्र पर कहर बरपा सकता है।

राजेश खण्डेलवाल द्वारा

दुनिया में जापान को बुजुर्ग देश कहा जाता है तो भारत युवा राष्ट्र कहलाता है। बढ़ती नवजात व शिशु मृत्यु दर, महिलाओं में घटती प्रजनन दर और बढ़ता कुपोषण भारत के युवा राष्ट्र पर कहर बरपा सकता है। अगर देश में हालात ऐसे ही बने रहे तो भविष्य में काम वाले हाथ (वर्किंग हैण्ड) कम पड़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। यह परिस्थिति गंभीर चिंता का विषय का है और इस पर समय रहते चिंतन करने के साथ ही सार्थक कदम उठाने की आवश्यकता है।

सर्वाधिक बच्चे वर्ष 2003 में पैदा हुए

अध्ययन एवं रिपोर्टों के मुताबिक देश में सर्वाधिक बच्चे वर्ष 2003 में पैदा हुए। इससे पहले और बाद में अभी तक इतनी संख्या में बच्चे पैदा नहीं हुए। वर्ष 2021 में देश में जीवित बच्चों की संख्या करीब 7 लाख कम रही। इस तरह वर्ष 2003 के मुकाबले वर्ष 2021 में पैदा हुए बच्चों की संख्या प्रतिदिन करीब 19 सौ कम रही। वहीं वर्ष 2005 में महिलाओं की प्रजनन दर 3 से कुछ कम रही, जो वर्ष 2019 में 2 बच्चों पर आ गई, जो विश्व के ऐवरेज से कम है। इस तरह करीब डेढ़ दशक में महिलाओं में प्रजनन दर करीब 50 फीसदी तक गिरी।

ADVERTISEMENT

महिलाओं में प्रजनन क्षमता प्रभावित हुई

यूं तो देश में कम होती बच्चों की संख्या के विविध कारण हैं पर घरेलू निर्णयों में महिलाओं की भागेदारी 37 प्रतिशत से बढ़कर 89 होने से बढ़े जिम्मेदारी के भार ने महिलाओं में बच्चा जनने के प्रति रुझान कम किया है। इनके अलावा युवक-युवतियों की बैवाहिक उम्र का बढऩा और कॅरियर की चिंता में समय रहते बच्चा पैदा करने से परहेज भी एक बड़ा कारण है। हम दो, हमारे दो की अवधारणा के बाद अब बच्चा एक ही अच्छा ने भी कोढ़ में खाज का काम किया है, जिससे चाचा, ताऊ, फूफा, मौसी, चाची, भुआ, ताई जैसे सामाजिक रिश्ते गौण होते जा रहे हैं। भ्रुण हत्या भी कम अभिशाप नहीं है, जिसकी रोकथाम के लिए और काम करने की जरूरत है। देश में ऐसे हालात ग्रामीण क्षेत्र की अपेक्षा शहरी क्षेत्रों में ज्यादा बदतर हैं।

खराब नवजात मृत्यु दर

देश में जन्मे एक हजार में से 20 नवजात काल के ग्रास बन जाते हैं तो एक हजार में से 30 शिशु मौत के शिकार हो जाते हैं। मरने वाले नवजातों में से करीब 40 फीसदी नवजात प्रसव के दौरान या फिर जन्म के बाद 24 घंटे में मृत्यु के शिकार बन जाते हैं। इनमें भी यूपी, बिहार, मध्यप्रदेश, राजस्थान की स्थिति ज्यादा खराब है, जहां यह आंकड़ा 35 तक पहुंच जाता है, जो देश में नवजात मृत्यु दर का 55 फीसदी है।

जन्म के समय श्वांस में अवरोध से अकाल मृत्यु

देश में मरने वाले नवजातों में से 20 फीसदी नवजातों की मृत्यु का कारण जन्म के समय श्वांस में अवरोध होता है। एक अध्ययन रिपोर्ट के मुताबिक बिहार में 61.1 फीसदी बच्चों की मौत जन्म के 48 घंटे में श्वांस अवरोध के कारण हो जाती है। इसका मूल कारण श्वांस में अवरोध के पहले मिनट में तत्काल प्रभावी इंतजामों का अभाव है।

हालांकि लैबर रूम में बैग और मास्क होते हैं, लेकिन कई बार वे फैंफड़ों के फटने का कारण बन जाते हैं। दूसरा कारण यह भी माना जाता है कि बच्चे को लैबर रूम से यूनिट तक पहुंचाने में समय लग जाता है या फिर वहां भी कुशल कर्मचारी के अभाव जैसी समस्या बनी रहती है। ग्रामीण अंचल में तो ऐसी सुविधाएं ही नहीं होती और अंयत्र ले जाने में समय लगने से इस अवधि में बच्चा प्राण त्याग देता है।

किशोरियां खून की कमी के कारण कुपोषण की गिरफ्त

देश में आधी से अधिक किशोरियां खून की कमी के कारण कुपोषण की गिरफ्त में हैं। ऐसे ही कारणों से जीवित बच्चों में से करीब एक तिहाई बच्चे भी कुपोषण की चपेट में आ जाते हैं। इससे उनका मानसिक विकास ही नहीं रुकता, बल्कि कुछ औसत वजन में कम (पतले) तो कुछ ज्यादा (मोटे) रह जाते हैं। वहीं कुछ हाईट (लम्बाई) में कम रह जाते हैं तो कुछ ज्यादा लम्बे हो जाते हैं। हालत ऐसे ही रहे तो आने वाले समय में कुपोषित यानि नाटे, पतले और मोटे बच्चों की संख्या बढ़कर दो तिहाई हो जाएगी।

देश में किशोरियों के साथ ही अन्य महिलाओं में रक्त की कमी के कारण होने वाले कुपोषण को रोकने की महत्ती आवश्यकता है तो पैदा होने वाले बच्चों को सुरक्षित बचाना बड़ी चुनौती है।

क्या है युवा राष्ट्र के लिए बड़ा खतरा

ऐसा कहना अतिश्योक्तिपूर्ण नहीं होगा कि देश में बढ़ती शिक्षा व शहरीकरण के कारण एक तरफ महिलाओं में कम बच्चों को जन्म देने की प्रवृति बढ़ी है तो दूसरी तरफ पैदा होने वाले बच्चों में से कुपोषण के कारण स्वस्थ बच्चों की संख्या में कमी आ रही है। इससे देश में युवाओं की संख्या कम पड़ने का अंदेशा है, जो युवा राष्ट्र के लिए बड़ा खतरा हो सकता है। इससे निपटने के लिए फिलहाल पैदा हो रहे बच्चों को बचाना और जीवित बच्चों का स्वस्थ व शिक्षित होना समय की दरकार है।

नवजातों को बचाने में नियोनेटल रेसपिरेटर मशीन तो जीवित बच्चों को स्वथ्य बनाए रखने के लिए पोषण वाटिका और किचन गार्डन मील का पत्थर साबित हो सकते हैं। इनके लाइफ स्टाइल में बदलाव लाना और रक्त अल्पता से जूझती किशोरियों व महिलाओं को उचित पोषणयुक्त खाद्य सामग्री देना भी जरूरी है।

यह है भरतपुर की कहानी

Threat to the future of the country India
नवजातों को बचाने में सहायक नियोनेटल रेसपिरेटर मशीन

नवजात व शिशुओं की मृत्यु दर को कम करने के लिए लुपिन फाउन्डेशन ने प्रयोग के तौर पर राजस्थान के भरतपुर जिले में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र (पीएचसी) व सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों (सीएचसी) पर नियोनेटल रेसपिरेटर मशीन (नवजात श्वांसतंत्र मशीन) लगाई। इस मशीन के माध्यम से जिले के प्रत्येक पीएचसी व सीएचसी पर एक वर्ष में औसतन 300 नवजातों को सुरक्षित बचा लिया। इस तरह भरतपुर जिले में करीब 16 हजार नवजातों को बचाया जा चुका है। महाराष्ट्र के धूले में एप्रोटेक और एसबीएचजीएमसी ने भी अपने अध्ययन में ऐसा माना है। वहां मात्र 45 दिनों में ही 1000 जन्में बच्चों में से नवजातों की मृत्यु का आंकड़ा मात्र 7 रह गया।

ऐसी मशीन अगर पूरे देश के स्वास्थ्य केन्द्रों पर लगाईं जाएं तो नवजातों को बचाने की भारत सरकार की मंशा भी कारगर साबित हो सकती है। इसी मशीन के कारण नवजातों को बचाने में भरतपुर देश का पहला जिला बना है। इस मशीन की विशेषता यह है कि यह भारत में बनी है। यह मजबूत डिवाइस होने के साथ ही प्रसव स्थल पर इसे रखा जा सकता है। इसके लिए किसी बुनियादी ढांचे की आवश्यकता नहीं है। अकुशल पैरा मेडिकल स्टॉफ न्यूनतम प्रशिक्षण से ही इस मशीन का उपयोग कर सकता है।

क्या कहते हैं प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सीता राम गुप्ता

sita ram gupta
प्रसिद्ध समाजशास्त्री एवं समावेशी विकाश विशेषज्ञ श्री सीता राम गुप्ता।

लुपिन फाउन्डेशन के तत्कालीन अधिशासी निदेशक रहे और फिलहाल समृद्ध भारत अभियान के राष्ट्रीय संयोजक सीताराम गुप्ता कहते हैं कि आने वाले समय में देश की इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए सरकार को लड़ाई लडऩी होगी, जिसमें जन-जन का सहयोग जरूरी है। इसके लिए हर आंगनबाड़ी केन्द्र पर पोषण वाटिका लगाई जाए। साथ ही आंगनबाड़ी केन्द्र पर आने वाले हर बच्चे के घर पर किचन गार्डन विकसित हों।

कुपोषण पर विशेष अभियान चाहिए

इनकी जिम्मेदारी आंगनबाड़ी केन्द्र पर कार्यरत महिलाओं को सौंपी जाए, जो केन्द्र के निर्धारित समय के बाद किचन गार्डन की सार-संभाल करें और इसके लिए उन्हें इन्सेंटिव देकर प्रोत्साहित किया जा सकता है। इस तरह से कुपोषण के शिकार बच्चों को आंगनबाड़ी केन्द्र और उसके बाद घर पर भी पोषणयुक्त खाद्य सामग्री सहज सुलभ हो सकेगी। इतना ही नहीं, देश में कुपोषण पर नियंत्रण पाने के लिए इसे पल्स पोलियो से मुक्ति की भांति अभियान बनाकर चलाया जाए, जिसमें जन-जन की सहभागिता हो। इसके लिए आर्थिक रूप से सक्षम लोग अपना जन्मदिन आंगनबाड़ी केन्द्रों पर पहुंचकर कुपोषित बच्चों के बीच मनाएं और उन्हें पोषित फल या खाद्य सामग्री वितरित करें तो काफी हद तक कुपोषण की रोकथाम में मदद होगी। कुपोषित बच्चों के लाइफ स्टाइल भी पर ध्यान केन्द्रित करना जरूरी है। इसके लिए उन्हें फास्ट फूड़ खाने से रोकने और फिटनेस के प्रति जागरूक किया जाना चाहिए।

कुपोषण से बचाइए

बिडम्बना यह भी है कि भारत में मानव जीवन की उम्र बढ़ी है, जिससे बुजुर्गों की संख्या बढ़ेगी तो जीवित बच्चों को कुपोषण से बचाना है। अन्यथा दोनों ही स्थितियों में देश में निर्भर लोगों की संख्या और काम करने वाले हाथों की संख्या का अनुपात बिगडऩे से रोकना मुश्किल होगा, जो आजादी के सौ साल पूरे करने के बाद किसी खतरे से कम नहीं होगा।

Rajesh Khandelwal
वरिष्ठ पत्रकार श्री राजेश खंडेलवाल।

(लेखक के बारे मेंः राजेश खण्डेलवाल वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

(यहाँ व्यक्त विचार लेखक के हैं)

Ambedkar Chamber
ADVERTISEMENT
India Sustainability Awards 2026
ADVERTISEMENT
ESG Professional Network
ADVERTISEMENT
Tags: Rajesh KhandelwalSita Ram GuptaThreat to the future of the Indiaराजेश खण्डेलवाल
Economy India

Economy India

Economy India is one of the largest media on the Indian economy. It provides updates on economy, business and corporates and allied affairs of the Indian economy. It features news, views, interviews, articles on various subject matters related to the economy and business world.

Related Posts

Govt Cheating Cotton Farmers, Textile Exporters Over India–US Trade Deal: Rahul Gandhi
Opinion

Govt. Cheating Cotton Farmers, Textile Exporters Over India–US Trade Deal: Rahul Gandhi

February 14, 2026
Union Budget 2026–27 to Open New Avenues for Odisha’s Development: Dharmendra Pradhan
Opinion

Union Budget 2026–27 to Open New Avenues for Odisha’s Development: Dharmendra Pradhan

February 8, 2026
Trade Deals Reduce Uncertainty, Accelerate Capital Formation: Sebi Chairman Tuhin Kanta Pandey
Opinion

Trade Deals Reduce Uncertainty, Accelerate Capital Formation: Sebi Chairman Tuhin Kanta Pandey

February 4, 2026
Union Budget 2026 Opens New Opportunities for Bihar
Opinion

Union Budget 2026 Opens New Opportunities for Bihar

February 2, 2026
Modi Govt Wants to Push India Back to Era of ‘Maharajas’: Rahul Gandhi Slams Alleged MGNREGA Rollback
Opinion

Modi Govt Wants to Push India Back to Era of ‘Maharajas’: Rahul Gandhi Slams Alleged MGNREGA Rollback

January 27, 2026
Ignoring Layout Planning Increases Industrial Costs; Better Planning Can Ensure Savings and Quality — D.K. Sarawgi
Opinion

Ignoring Layout Planning Increases Industrial Costs; Better Planning Can Ensure Savings and Quality — D.K. Sarawgi

December 30, 2025
Next Post
FEATURED IMAGE ECONOMY INDIA 1 1

India's Modi has Mixed Record of Economic Management

Ambedkar Chamber
ADVERTISEMENT
India Sustainability Awards 2026
ADVERTISEMENT
ESG Professional Network
ADVERTISEMENT

LATEST NEWS

Trump’s Flip-Flops on Iran War Leave Americans Confused

India’s Banking Crossroads: Branch Expansion vs Digital Dominance in a Hybrid Financial Future

Trump May End Iran Conflict Without Reopening Strait of Hormuz: Report

Himachal Pradesh Budget FY27: A Deep State Economy Analysis of Fiscal Pressures, Limited Capex, and Growth Challenges

India vs China at the WTO: A Geopolitical Analysis of the Investment Pact Divide

ED Restores ₹15,000 Crore Worth Assets in PACL Scam Case to Facilitate Investor Refunds

Mamata Banerjee Accuses BJP of Creating Social Divisions, Questions Political ‘Chargesheet’

WTO Reform at a Crossroads: India’s Pushback Against ‘Weaponised Transparency’ and the Future of Global Trade Governance

  • ABOUT US
  • CONTACT
  • TEAM
  • TERMS & CONDITIONS
  • GUEST POSTS

Copyright © 2024 - Economy India | All Rights Reserved

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In
No Result
View All Result
  • Home
  • Economy
  • Business
  • Companies
  • Finance
  • People
  • More
    • Insurance
    • Interview
    • Featured
    • Health
    • Technology
    • Entrepreneurship
    • Opinion
    • CSR
    • Stories

Copyright © 2024 - Economy India | All Rights Reserved