नई दिल्ली | Economy India
सोने और चांदी की कीमतों में हाल के दिनों में जारी उतार-चढ़ाव का दौर सोमवार को भी जारी रहा। India Bullion and Jewellers Association (IBJA) के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, चांदी के भाव लगातार तीसरे कारोबारी दिन गिरावट के साथ बंद हुए, जबकि सोना कुछ सुधार के साथ ऊपर आया।
चांदी आज ₹1,486 सस्ती होकर ₹2,40,947 प्रति किलो पर बंद हुई। इससे पहले शुक्रवार को चांदी की कीमत ₹2,42,433 प्रति किलो थी। वहीं सोना 10 ग्राम ₹1,333 की बढ़त के साथ ₹1,54,098 पर पहुंचा। शुक्रवार को सोना ₹1,52,765 प्रति 10 ग्राम पर था।
पिछले तीन कारोबारी दिनों में चांदी ₹25,502 और सोना ₹3,224 सस्ता हुआ है, जबकि पिछले 18 कारोबारी दिनों में चांदी में कुल गिरावट लगभग ₹1.45 लाख प्रति किलो के करीब पहुँच गई है। इसी अवधि में सोना लगभग ₹22,023 प्रति 10 ग्राम की गिरावट के बाद सीमित रिकवरी का संकेत दे रहा है।
रिकॉर्ड उच्च स्तर से गिरावट
29 जनवरी 2026 को सर्राफा बाजार में दोनों धातुओं ने रिकॉर्ड स्तर छुए थे।
- सोना: ₹1,76,121 प्रति 10 ग्राम (ऑल-टाइम हाई)
- चांदी: ₹3,85,933 प्रति किलो (ऑल-टाइम हाई)
उसी के बाद से चांदी की कीमतों में कटौती का दबाव तेज हुआ है, तथा सोना भी अपने रिकॉर्ड स्तर से व्यापक रूप से नीचे आ गया है।
अलग-अलग शहरों में रेट क्यों भिन्न?
IBJA के जारी रेट्स में 3% GST, मेकिंग चार्ज और ज्वेलर्स का मार्जिन शामिल नहीं होता है। इसी वजह से अलग-अलग शहरों में सोना-चांदी के रेट में अंतर देखने को मिलता है। इन IBJA रेट्स का उपयोग Reserve Bank of India सोवरेन गोल्ड बॉन्ड के रेट तय करने और कई बैंकों द्वारा गोल्ड लोन की दर निर्धारित करने में किया जाता है।
इसलिए, किसी शहर के रेट कुछ अधिक या कम दिखाई दें, तो उसका कारण इस संरचना में शामिल नहीं किए गए तत्व और स्थानीय स्तर पर लागू मेकिंग चार्ज/मार्जिन को माना जाता है।
गिरावट के पीछे के कारण
विश्लेषकों का मानना है कि सोने और चांदी दोनों में हालिया गिरावट के कई प्रमुख कारण हैं:
🔹 वैश्विक संकेत
अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की मजबूती और अमेरिका से जुड़े आर्थिक संकेत, ब्याज दरों की अनिश्चितता और मुद्रास्फीति रियलिटी का असर सोने-चांदी पर देखा गया।
🔹 कच्चे तेल की कीमतों में नरमी
भारत एक बड़ा तेल आयातक देश है। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आयी तो रुपये को कुछ हद तक सहारा मिला, जिससे डिमांड सेंटिमेंट पर मिश्रित असर पड़ा।
🔹 मुनाफावसूली
रिटेल और होलसेल निवेशकों ने रिकॉर्ड स्तरों के बाद मुनाफा लेने की रणनीति अपनाई, जिससे सप्लाई बढ़ी और भावों पर दबाव रहा।
🔹 वैश्विक मांग-आपूर्ति गतिशीलता
विश्वभर में आर्थिक गतिविधियों के स्तर, उत्पादन और उपभोग की दिशा के बदलाव ने भी रेट पर दबाव डाला।
निवेशकों के रुख में बदलाव
पिछले तीन कारोबारी सत्रों में मिली गिरावट के बाद निवेशक खरीदारी की ओर लौटे हैं। विशेषज्ञों ने कहा कि खरीदार खासकर निचले स्तर पर फिजिकल गोल्ड और सिल्वर खरीद रहे हैं, हालांकि यह गतिविधि अभी व्यापक तेजी में नहीं बदली है।
फिर भी जानकारों का सुझाव है कि सोने-चांदी में एकमुश्त निवेश से बचना चाहिए। इसकी बजाय धीरे-धीरे चरणबद्ध निवेश रणनीति (SIP-type approach) अपनाना बेहतर हो सकता है।
सोना खरीदते समय ध्यान देने योग्य बातें
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, सोना खरीदते समय निवेशकों को कुछ बातों पर ध्यान देना चाहिए:
✔ BIS सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें
हमेशा Bureau of Indian Standards (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सोना ही खरीदें। हॉलमार्क अल्फान्यूमेरिक कोड (जैसे AZ4524) से शुद्धता और गुणवत्ता सुनिश्चित होती है।
✔ भाव को हमेशा क्रॉस-चेक करें
सोने का भाव 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के अनुसार अलग-अलग होता है। खरीद के दिन इन रेट्स को IBJA जैसी अधिकृत वेबसाइट से मिलान करना आवश्यक है।
असली चांदी की पहचान कैसे करें?
सोने के समान चांदी की पहचान में भी सही जानकारी आवश्यक होती है। विशेषज्ञ इन तरीकों से वास्तविक चांदी की पुष्टि करने की सलाह देते हैं:
🔹 मैग्नेट टेस्ट
असली सिल्वर चुंबक से नहीं चिपकती। अगर चांदी चुंबक से चिपकती है, तो वह नकली हो सकती है।
🔹 आइस टेस्ट
सिल्वर पर बर्फ के टुकड़े रखें। असली सिल्वर पर बर्फ जल्दी पिघलती है।
🔹 स्मेल टेस्ट
असली सिल्वर में कोई गंध नहीं होती। नकली चांदी में सीसा या कॉपर जैसी गंध आ सकती है।
🔹 क्लॉथ टेस्ट
चांदी को सफेद कपड़े से रगड़ें। यदि काला निशान आए, तो यह असली चांदी होने का संकेत है।
आगे का परिदृश्य
विश्लेषक मानते हैं कि सोने-चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव अगले कुछ हफ्तों तक जारी रह सकता है क्योंकि वैश्विक आर्थिक संकेत, ब्याज दरों के रुझान और निवेश धारणा बाजारों में प्रभाव डाल रहे हैं।
लम्बी अवधि में सोने और चांदी को सुरक्षित निवेश विकल्प माना जाता रहा है, खासकर वित्तीय अनिश्चितताओं और वैश्विक geopolitical तनाव के समय। हालांकि अल्पकालिक उतार-चढ़ाव निवेशकों के लिए खरीद और बिक्री के अवसर भी पैदा करते हैं।
सोना और चांदी दोनों ही भारतीय निवेशकों के लिए पोर्टफोलियो-डायवर्सिफिकेशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वर्तमान में चांदी में आई तेज गिरावट और सोने की सीमित रिकवरी निवेशकों को सोचने पर मजबूर कर रही है कि अब कौन सी रणनीति अपनाई जाए। विशेषज्ञों की सलाह है कि धैर्य, चरणबद्ध निवेश और उचित रेट चेकिंग निवेश निर्णय को और बेहतर बना सकती है।
Economy India ऐसे बाजार रुझानों और निवेश से जुड़े अपडेट्स पर सतत् निगरानी रखता है और समय-समय पर विशेषज्ञ की राय साझा करता रहेगा।







