नई दिल्ली | Economy India
भारतीय कृषि व्यवस्था लंबे समय से वित्तीय असमानताओं, सीमित क्रेडिट पहुंच और महंगे अनौपचारिक कर्ज के दबाव से जूझती रही है। ऐसे में किसानों को समय पर, सस्ता और जरूरत के मुताबिक ऋण उपलब्ध कराने वाली किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है।
Reserve Bank of India (RBI) ने किसान क्रेडिट कार्ड योजना को अधिक लचीला, आधुनिक और तकनीक-आधारित बनाने के उद्देश्य से संशोधित दिशानिर्देशों (Draft Guidelines) का मसौदा जारी किया है। इस ड्राफ्ट के तहत KCC लोन को अब 6 साल तक की अवधि में चुकाने की सुविधा दी जाएगी। साथ ही, खेती के पारंपरिक खर्चों के अलावा मिट्टी की जांच, मौसम पूर्वानुमान, जैविक खेती और आधुनिक कृषि तकनीकों के लिए भी वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का प्रस्ताव किया गया है।
RBI ने इन प्रस्तावों पर 6 मार्च 2026 तक किसानों, बैंकों, विशेषज्ञों और आम जनता से फीडबैक मांगा है। माना जा रहा है कि फाइनल गाइडलाइंस लागू होने के बाद यह योजना भारतीय कृषि वित्त प्रणाली में अब तक का सबसे बड़ा संरचनात्मक सुधार साबित हो सकती है।

किसान क्रेडिट कार्ड योजना: उद्देश्य और अब तक का सफर
किसान क्रेडिट कार्ड योजना की शुरुआत किसानों को खेती के लिए समय पर और सस्ता ऋण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी। इससे पहले किसानों को साहूकारों और अनौपचारिक स्रोतों से ऊंची ब्याज दरों पर कर्ज लेना पड़ता था, जिससे कर्ज का जाल गहराता चला जाता था।
KCC योजना के तहत किसान निम्नलिखित जरूरतों के लिए ऋण ले सकते हैं—
- फसल उत्पादन और बीज-खाद की खरीद
- सिंचाई और कृषि इनपुट
- कटाई के बाद के खर्च
- कृषि उत्पादों की मार्केटिंग
- घरेलू आवश्यकताएं
- फार्म एसेट्स की मरम्मत और रखरखाव
- एलाइड एक्टिविटीज जैसे पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन
2019 में इस योजना का दायरा बढ़ाते हुए इसे एनिमल हसबेंड्री, डेयरी और फिशरीज सेक्टर तक विस्तारित किया गया, जिससे करोड़ों किसानों को औपचारिक बैंकिंग सिस्टम से जोड़ने में मदद मिली।
RBI का नया ड्राफ्ट: बदलाव क्यों जरूरी थे?
विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा KCC ढांचे में कुछ ऐसी कमियां थीं जो समय के साथ किसानों के लिए परेशानी का कारण बन रही थीं—
- अलग-अलग बैंकों में फसल सीजन की अवधि अलग-अलग थी
- लोन चुकाने की अवधि लंबी फसलों के लिए पर्याप्त नहीं थी
- खेती में बढ़ते टेक्नोलॉजी खर्च को कवर नहीं किया जाता था
- ड्रॉइंग लिमिट कई बार वास्तविक लागत से कम होती थी
इन खामियों को दूर करने और KCC को आधुनिक कृषि की जरूरतों से जोड़ने के लिए RBI ने व्यापक संशोधन प्रस्तावित किए हैं।

लोन चुकाने की अवधि अब 6 साल: किसानों को क्या राहत?
नए ड्राफ्ट का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण प्रस्ताव है KCC लोन की रीपेमेंट अवधि को बढ़ाकर 6 साल करना।
अब तक कई मामलों में किसानों को कम समय में लोन चुकाने का दबाव रहता था, खासकर उन किसानों पर जो—
- लंबी अवधि की फसलें उगाते हैं
- बागवानी या बहुवर्षीय फसलों पर निर्भर हैं
- मौसम या बाजार उतार-चढ़ाव से प्रभावित होते हैं
6 साल की अवधि मिलने से—
- किसानों पर तुरंत भुगतान का दबाव कम होगा
- आय और लोन रीपेमेंट के बीच बेहतर संतुलन बनेगा
- डिफॉल्ट का जोखिम घटेगा
फसल सीजन का मानकीकरण: कन्फ्यूजन खत्म
RBI ने फसल सीजन को स्टैंडर्डाइज करने का भी प्रस्ताव रखा है—
- कम अवधि की फसल: 12 महीने
- लंबी अवधि की फसल: 18 महीने
इससे सभी बैंकों में—
- लोन सैंक्शन प्रक्रिया एक समान होगी
- रीपेमेंट शेड्यूल स्पष्ट रहेगा
- किसानों को नियम समझने में आसानी होगी
ड्रॉइंग लिमिट अब असल खेती लागत से जुड़ेगी
अब तक कई किसान इस शिकायत से जूझते रहे हैं कि KCC के तहत मिलने वाली राशि असल खेती खर्च से कम होती है। RBI ने इसे सुधारते हुए ड्रॉइंग लिमिट को हर फसल सीजन की Scale of Finance (वास्तविक लागत) से जोड़ने का प्रस्ताव किया है।
इससे—
- किसानों को पर्याप्त फंड मिलेगा
- बीच सीजन में अतिरिक्त कर्ज लेने की जरूरत घटेगी
- अनौपचारिक कर्ज पर निर्भरता कम होगी
मॉडर्न खेती के लिए नया रास्ता: टेक्नोलॉजी खर्च भी कवर
RBI के ड्राफ्ट का एक क्रांतिकारी पहलू यह है कि अब KCC के तहत मिलने वाले 20% अतिरिक्त प्रोविजन में आधुनिक कृषि तकनीकों से जुड़े खर्च भी शामिल किए जाएंगे।
अब इन खर्चों को मिलेगा KCC से सपोर्ट:
- मिट्टी की जांच (Soil Testing)
- रियल-टाइम मौसम पूर्वानुमान सेवाएं
- जैविक खेती (Organic Farming)
- गुड एग्रीकल्चरल प्रैक्टिसेज (GAP) सर्टिफिकेशन
यह बदलाव खेती को डेटा-ड्रिवन, टिकाऊ और जलवायु-अनुकूल बनाने में मदद करेगा।
जैविक खेती और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा
सरकार और नीति-निर्माता लंबे समय से ऑर्गेनिक और सस्टेनेबल फार्मिंग को बढ़ावा देने की बात कर रहे हैं। लेकिन लागत अधिक होने के कारण किसान इसे अपनाने से हिचकते थे।
KCC के तहत इन खर्चों को शामिल किए जाने से—
- जैविक खेती को आर्थिक समर्थन मिलेगा
- रासायनिक इनपुट पर निर्भरता घटेगी
- मिट्टी की सेहत सुधरेगी
- लंबे समय में किसानों की आय बढ़ेगी
किन बैंकों पर लागू होंगे नए नियम?
RBI के प्रस्तावित दिशानिर्देश निम्न संस्थानों पर लागू होंगे—
- कमर्शियल बैंक
- स्मॉल फाइनेंस बैंक
- रीजनल रूरल बैंक (RRB)
- रूरल को-ऑपरेटिव बैंक
इससे KCC के तहत पूरे देश में एकरूपता आएगी।
किसानों को कुल मिलाकर क्या फायदा होगा?
विशेषज्ञों के अनुसार, नए ड्राफ्ट से किसानों को कई स्तरों पर लाभ मिलेगा—
- लंबी रीपेमेंट अवधि से आर्थिक तनाव कम
- असल लागत के मुताबिक क्रेडिट से फंड की कमी नहीं
- टेक्नोलॉजी सपोर्ट से उत्पादकता में बढ़ोतरी
- अनौपचारिक कर्ज से मुक्ति
फीडबैक प्रक्रिया: किसानों की भागीदारी अहम
RBI ने साफ किया है कि—
- किसान
- बैंक
- कृषि विशेषज्ञ
- आम नागरिक
6 मार्च 2026 तक इस ड्राफ्ट पर अपनी राय दे सकते हैं। फीडबैक RBI की वेबसाइट या ई-मेल के जरिए भेजा जा सकता है। सभी सुझावों के बाद फाइनल गाइडलाइंस जारी की जाएंगी।
KCC का नया दौर?
अगर RBI के प्रस्तावित बदलाव लागू होते हैं, तो किसान क्रेडिट कार्ड योजना केवल एक लोन स्कीम नहीं बल्कि आधुनिक भारतीय कृषि का फाइनेंशियल इंजन बन सकती है।
लंबी लोन अवधि, टेक्नोलॉजी सपोर्ट और किसान-केंद्रित दृष्टिकोण के साथ यह सुधार किसानों की आय, स्थिरता और आत्मनिर्भरता को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है।
— Economy India | Agriculture & Banking Desk






