नई दिल्ली | Economy India
अमेरिकी मुद्रास्फीति और रोजगार से जुड़े मजबूत आर्थिक आंकड़ों के बीच सोने और चांदी की कीमतों में जारी गिरावट आने वाले सप्ताह में भी थमती नहीं दिख रही है। सर्राफा बाजार से जुड़े विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर मौद्रिक सख्ती के संकेत और डॉलर की मजबूती के कारण कीमती धातुओं पर दबाव बना रहेगा, हालांकि बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है।
अमेरिकी मुद्रास्फीति और रोजगार आंकड़ों पर निवेशकों की नजर
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, निवेशक इस समय अमेरिका से आने वाले प्रमुख आर्थिक संकेतकों—मुद्रास्फीति दर, सकल घरेलू उत्पाद (GDP) और Federal Reserve की मौद्रिक नीति—पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।
हाल ही में जारी अमेरिकी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) और रोजगार आंकड़ों ने यह संकेत दिया है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था अपेक्षा से अधिक मजबूत बनी हुई है। इससे यह संभावना बढ़ी है कि फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कटौती को टाल सकता है या मौजूदा सख्त रुख को लंबे समय तक बनाए रख सकता है।

ब्याज दरों की अनिश्चितता से कीमती धातुओं पर दबाव
विशेषज्ञों का कहना है कि ऊंची ब्याज दरें आमतौर पर सोने और चांदी जैसी गैर-ब्याज देने वाली परिसंपत्तियों के लिए नकारात्मक मानी जाती हैं। जब अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर मजबूत होते हैं, तो निवेशक सुरक्षित लेकिन रिटर्न देने वाले विकल्पों की ओर झुकते हैं।
एक कमोडिटी विश्लेषक के अनुसार,
“जब तक अमेरिकी मुद्रास्फीति और रोजगार बाजार में ठंडक के स्पष्ट संकेत नहीं मिलते, तब तक सोने-चांदी में तेज रिकवरी की संभावना सीमित है।”
घरेलू बाजार में भी दिखेगा असर
वैश्विक रुझानों का सीधा असर भारतीय सर्राफा बाजार पर भी पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय कीमतों में कमजोरी के चलते घरेलू बाजार में सोने और चांदी के भाव दबाव में रह सकते हैं, हालांकि रुपये की चाल और स्थानीय मांग इसमें संतुलन का काम कर सकती है।
विशेष रूप से शादी-विवाह के मौसम में भौतिक मांग कीमतों में तेज गिरावट को सीमित कर सकती है, लेकिन अल्पकालिक निवेशकों के लिए बाजार अस्थिर बना रह सकता है।
सुरक्षित निवेश की चमक फिलहाल फीकी
आमतौर पर वैश्विक अनिश्चितता के समय सोना सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन वर्तमान परिदृश्य में मजबूत अमेरिकी अर्थव्यवस्था और फेड की सख्त नीति इस धारणा को कमजोर कर रही है। चांदी, जो औद्योगिक धातु भी है, उस पर वैश्विक मांग को लेकर चिंताओं का अतिरिक्त दबाव बना हुआ है।
निवेशकों के लिए क्या रणनीति?
विश्लेषकों की राय है कि निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने से बचना चाहिए और अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों व केंद्रीय बैंक के संकेतों पर ध्यान देना चाहिए। अल्पकाल में कीमतों में और गिरावट संभव है, जबकि मध्यम से लंबी अवधि में भू-राजनीतिक घटनाक्रम और वैश्विक आर्थिक सुस्ती जैसे कारक फिर से सोने को समर्थन दे सकते हैं।
अमेरिकी मुद्रास्फीति, रोजगार आंकड़े और फेडरल रिजर्व की नीतियां फिलहाल सोने-चांदी की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभा रही हैं। जब तक वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों में नरमी के स्पष्ट संकेत नहीं मिलते, तब तक कीमती धातुओं में दबाव और उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
— Economy India | Commodities Desk






